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Poem Archive
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August 2026 7 poemsहि मुझे मुझसे ही मिलने के लिए हि तिरे बिन सनम अब गुज़ारा नहीं हि कभी शोरगुल वाले किसी मयखाने हि तुम आज के दौर के लड़के हो हि बिना तेरे कोई सहारा नहीं हि तिरंगा हमारा सब से ऊँचा रहे हि तुम्हारी कमी उतर आती है कमरे मेंJuly 2026 21 poemsहि में तुम्हारे शहर आया हूँ, मिलने, आओगी क्या हि जहालत, बेहुनरी के बाज़ार में, ऐसा हो नहीं सकता था हि अगर छाँव हमारी है, तो धूप भी हमारी है हि तुम्हारे बाद नहीं, तुम्हारे साथ हि छात्र नदी होते हैं... हि कोई चाँद, कोई वादी, कोई नज़ारा नहीं चाहिए, हि तू मेरे घर तो आ हि हम खामोश क्यों हैं हि टकरा गए एक बाज़ार में हि और यही सोचते-सोचते... हि बरसों के बाद हम जो मिले हैं हि मिलकर तुमसे मेरे दिल को वो सुकून मिला हि अदा कौन सी है हि तुझमें रब को पाया हि तो भी चाहूँगी हाँ। हि आख़िरी इक सवाल, इश्क़ से थोड़ा आगे, फ़लसफ़ा-ए-मोहब्बत हि तेरे संग चाय की आख़िरी चुस्की याद है मुझे। हि साहिल पे खड़े, मुझे क्या गम, चले जाना है, हि चेहरे पे उसने एक नया चेहरा सजा लिया हि अब दोबारा उडने के काबिल नहीं रहा हूँ में हि मोहब्बत नहीं समझतेApril 2026 3 poemsहि ज़िंदगी की हर साँस तुझपे वार दूँ, हि शंखपुष्पी पुष्प हि एक इशारे पे उसके दिल का दरवाजा खोल सकता हैMarch 2026 9 poemsहि तेरी सूरत के सिवा कुछ और अच्छा नही लगता हि हर इक नज़ारे में देखो ख़ुदा का साया है हि मैंने दिल के हुजरे में तेरी तस्वीर बना ली है हि न रूह मिले ना तन मिले, फिर कैसा वो प्यार हि घर की पुकार बुलाती है हि तेरे साथ रहकर ये असर मुझपे हुआ है हि हर लफ़्ज़ में तेरी याद पिघलती जाती है हि तुम्हें दिल लगाना भी नहीं आता। हि ऐसा भी हो सकता था