शब्दभावदिलरूहइश्क़वफ़ादर्दख़्वाब
मेरी कविताएँ · 35 Poems
गौरव
बालोरिया
प्रेम, विरह और ज़िंदगी के एहसासों को शब्दों में पिरोया है।
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ग़ालिबगुलज़ारदिनकरकबीरमीरफ़ैज़अहमद
महान कवि · 12 Poets
महान
शायर
ग़ालिब, गुलज़ार, दिनकर और अन्य कवियों की रचनाएँ।
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म
प्रेम
में तुम्हारे शहर आया हूँ, मिलने, आओगी क्या
में तुम्हारे शहर आया हूँ, मिलने, आओगी क्या, दिल भी साथ लाया हूँ, मिलने, आओगी क्या। टेबल रिज़र्व करा दी, शाम भी थाम रखी है, मैंने बस तुम्हें बुलाया है, मिलने, आओगी क्या। तुम्हारे नाम पे नज़्म लिखी है रात भर जाग कर...
ज
जहालत, बेहुनरी के बाज़ार में, ऐसा हो नहीं सकता था
अ
प्रेम
अगर छाँव हमारी है, तो धूप भी हमारी है
त
प्रेम
तुम्हारे बाद नहीं, तुम्हारे साथ
छ
देशभक्ति
छात्र नदी होते हैं...
क
प्रेम
कोई चाँद, कोई वादी, कोई नज़ारा नहीं चाहिए,
त
प्रेम
तू मेरे घर तो आ
ह
देशभक्ति
हम खामोश क्यों हैं
ट
प्रेम
टकरा गए एक बाज़ार में
Poet of the Week
18th Century / Mughal Era
Mir Muhammad Taqi
Mir Muhammad Taqi, famously known by his pen name Mir Taqi Mir, was the leading Urdu poet of the 18th century and one of the principal architects of the Urdu language. Widely revered as Khuda-e-Sukhan (God of Poetry), he was a master of the ghazal and a centr…