शब्दभावदिलरूहइश्क़वफ़ादर्दख़्वाब
मेरी कविताएँ · 35 Poems

गौरव
बालोरिया

प्रेम, विरह और ज़िंदगी के एहसासों को शब्दों में पिरोया है।

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महान कवि · 12 Poets

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प्रेम

में तुम्हारे शहर आया हूँ, मिलने, आओगी क्या

में तुम्हारे शहर आया हूँ, मिलने, आओगी क्या, दिल भी साथ लाया हूँ, मिलने, आओगी क्या। टेबल रिज़र्व करा दी, शाम भी थाम रखी है, मैंने बस तुम्हें बुलाया है, मिलने, आओगी क्या। तुम्हारे नाम पे नज़्म लिखी है रात भर जाग कर...

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जहालत, बेहुनरी के बाज़ार में, ऐसा हो नहीं सकता था

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प्रेम

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देशभक्ति

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प्रेम

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देशभक्ति

हम खामोश क्यों हैं

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प्रेम

टकरा गए एक बाज़ार में

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Mera Kuch Samaan

"Mera kuch saamaan tumhare paas pada hai, O saawan ke kuch bheege bheege din rakhe hain..."

Gulzar

Ishq Par Zor Nahin

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Mirza Ghalib

छुक छुक छुक छुक रेल चली है जीवन की,

"छुक छुक छुक छुक रेल चली है जीवन की, हँसना-रोना, जागना-सोना, खोना-पाना, सुख-दुख। छुक छुक छुक छुक रेल चली है जीवन की।2 छोटी-छोटी सी बातों से मोटी-…"

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"चल हंसा वा देस, जहाँ पिया बसत हैं भूल गयो है अपनो देस, जहाँ पिया बसत हैं तोर बिना मोरा जी घबरावत, अंखियन जल भर आवत है बिरह की आग लगी घट भीतर, …"

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मुझको अपने बैंक की किताब दीजिए

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Manjar Bhopali
Mir Muhammad Taqi
18th Century / Mughal Era

Mir Muhammad Taqi

Mir Muhammad Taqi, famously known by his pen name Mir Taqi Mir, was the leading Urdu poet of the 18th century and one of the principal architects of the Urdu language. Widely revered as Khuda-e-Sukhan (God of Poetry), he was a master of the ghazal and a centr…