शंखपुष्पी पुष्प
शंखपुष्पी पादप है बहुत गुणवान
छोटा सा पुष्प गुण इसके महान
इसके दर्शन को सब मंगल माने
सेवन करके इसका रोग भगाले
तीन रंग में तुम लगते कितने प्यारे
श्वेत रक्त नील रंग में लगते न्यारे
पथरीले जंगलों में तुम पाए जाते
आयर्वेदिक गुणों से रोग भागते
कुष्ठ कीड़े विष को नष्ट कर देते
कई बीमारीओं का हल तुम देते
मिलकर जड़ी बूटियों का करें सरंक्षण
प्रकृति की यह धरोहरें न हो जाएँ बर्बाद
हिंदी भावार्थ
प्रस्तुत कविता में शंखपुष्पी पौधे के औषधीय और आध्यात्मिक महत्व को दर्शाया गया है। कवि इसके विभिन्न रंगों, रोगों को दूर करने की क्षमता और इसके शुभ दर्शन की प्रशंसा करते हुए अंत में प्रकृति की इस अमूल्य जड़ी-बूटी धरोहर के संरक्षण का संदेश देते हैं।
English Translation
This poem highlights the medicinal and spiritual significance of the Shankhpushpi plant. The poet praises its diverse colors, disease-curing properties, and auspicious presence, while ultimately delivering a vital message to conserve these invaluable herbal treasures of nature.