हिन्दी #FakirPoet #Heartbreak #SadStory #MissingSomeone #EmotionalVideo आशा

और यही सोचते-सोचते...

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कल रात एक बहुत अजीब सा सपना देखा... एक अनजान सी भीड़ थी, और एक बहुत शोर शराबे वाला बाज़ार। उस भीड़ से बचकर मैं निकल ही रहा था... कि अचानक वो सामने से आई, और सीधा मुझसे टकरा गई। मेरे हाथ से मेरा सारा सामान नीचे बिखर गया... और उसके हाथ से उसका फ़ोन। चेहरे पर भयंकर गुस्सा, तनी हुई भौहें... वो झुंझलाते हुए बोली— 'अंधे हो क्या? दिख नहीं रहा था, मेरा फ़ोन गिर गया!' मैं हल्का सा मुस्कुराया, अपना सामान वहीं छोड़ा, और उसका फ़ोन उठाने के लिए जैसे ही हाथ आगे बढ़ाया... कि अचानक वो बाज़ार का शोर, वो भीड़, और उसका वो गुस्सा... सब गायब हो गया। मेरी आँख खुल गई। कमरे में वही भयानक खामोशी थी, और सामने खाली दीवार। सच कहूँ तो... उस सपने में उसका मुझ पर चिल्लाना, हकीकत की इस खामोशी से बहुत बेहतर था। कम से कम... कुछ पल के लिए ही सही, वो मेरे सामने तो थी।
यह गद्य-कविता अकेलेपन और विरह की गहरी वेदना को दर्शाती है, जहाँ नायक वास्तविकता के सन्नाटे से बचने के लिए सपने के कोलाहल और अपनी प्रियतमा के गुस्से को भी गले लगाने को तैयार है। सपना टूटने पर मिलने वाली खामोशी उसे यह अहसास कराती है कि किसी का रूठना या चिल्लाना भी उस अकेलेपन से बेहतर है जो उसके जाने के बाद जीवन में पसर गया है।
This prose-poem depicts the deep pain of loneliness and separation, where the protagonist is willing to embrace even the chaos of a dream and the anger of his beloved to escape the silence of reality. The silence that follows the broken dream makes him realize that someone's anger or shouting is far better than the absolute loneliness that has spread in his life after their departure.
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