छात्र नदी होते हैं...
पहाड़ों से उतरते,
सपनों से भरे,
शोर नहीं करते,
बस अपना रास्ता चुनते हैं।
जिधर ज्ञान की ज़मीन मिले,
उधर मुड़ जाते हैं,
जिस हाथ में भरोसा दिखे,
उसी का हाथ पकड़ लेते हैं।
नदी को मोड़ना आसान है,
पर रोकना नहीं।
जब उसके रास्ते में
पत्थर रखे जाते हैं,
बांध खड़े किए जाते हैं,
तो वह बहना नहीं छोड़ती,
बस अपना हिसाब बदल देती है।
और फिर एक दिन
वही शांत धारा
सैलाब बनकर लौटती है।
उस वक़्त
न पत्थर बचते हैं,
न दीवारें,
न घमंड।
जो सोचते हैं
डंडों से सवाल मर जाएंगे,
उन्हें शायद
नदियों का स्वभाव नहीं मालूम।
आवाज़ दबती नहीं,
बस इकट्ठी होती है,
जैसे बांध से पानी सूखता नहीं
बस इक्क्ठा होता रहता है।
आज इस मुल्क में
हवा भी सवाल करती है,
पानी भी,
सड़कें भी,
नदियाँ भी
शिक्षा भी,
साधन भी,
संसाधन भी।
कहीं गंदगी बढ़ रही है,
कहीं भ्रष्टाचार,
कहीं बाबूशाही की मोटी फाइलों में
ज़िंदगी अटकी हुई है।
रोटी, नौकरी,
इम्तिहान, इलाज,
हर मोड़ पर
आम आदमी
जी नहीं रहा,
बस किसी तरह
गुज़र रहा है।
और जब जीना
सिर्फ़ जीवित रहना है,
किसी तरह।
तो परिस्थियों में
सबसे पहले
छात्र बेचैन होते हैं।
क्योंकि उनके पास
खोने को सत्ता नहीं है।
इसलिए...
छात्रों को दुश्मन मत समझो,
वे किसी तख़्त के भूखे नहीं है।
वे तो बस
एक साफ़ बहती नदी हैं।
उन्हें रास्ता दोगे,
तो खेत सींचेंगे,
शहरों को जीवन देंगे।
लेकिन...
अगर उन्हें रोकने की ज़िद करोगे,
उनकी आवाज़ पर पहरा बैठाओगे,
तो याद रखना,
नदी हारती नहीं।
वह बस
एक दिन
इतनी बड़ी हो जाती है
कि
बांध नहीं बचते,
इतिहास बदल जाता है।
हिंदी भावार्थ
यह कविता छात्रों की तुलना बहती हुई नदी से करती है, जो शांत रहकर ज्ञान की खोज में आगे बढ़ती है और दमनकारी ताकतों के सामने झुकने के बजाय अपना रास्ता बदल लेती है। जब छात्रों की आवाज़ और उनके अधिकारों को दबाने का प्रयास किया जाता है, तो उनका यह संचित असंतोष अंततः एक बड़े बदलाव या क्रांति का रूप ले लेता है। कविता सत्ता को चेतावनी देती है कि छात्रों को दबाने के बजाय उन्हें सही दिशा दी जाए, क्योंकि वे विनाश नहीं बल्कि समाज का नवनिर्माण करना चाहते हैं।
English Translation
This poem compares students to a flowing river that quietly moves forward in search of knowledge and changes its course instead of bowing down to oppressive forces. When attempts are made to suppress the voice and rights of students, their accumulated discontent eventually takes the form of a major revolution or change. The poem warns the authorities to guide students in the right direction rather than suppressing them, as they seek to rebuild society rather than destroy it.