अदा कौन सी है
जो आज कर दिया तूने नज़रों से घायल,
मुझको बताओ ज़रा, वो अदा कौन सी है।
कल चुपके से कानों में कुछ राज़ कहे थे,
मगर आज ख़ामोशी में छुपी दुआ कौन सी है।
तेरे चेहरे पे ये जो नूर सा छाया है सनम,
तेरे क़दमों से जो महकी, वो फ़िज़ा कौन सी है।
अब तेरे बिना सूना सा लगता है मुझे घर,
मुझे इतना तो बताओ, मेरी खता कौन सी है।
मेरी हर ग़ज़ल में बस तेरा ही ज़िक्र रहा,
धड़कनों से फिर क्यों पूछूँ कि वफ़ा कौन सी है।
हिंदी भावार्थ
यह कविता प्रेम की गहरी और संवेदनशील अनुभूतियों को व्यक्त करती है, जहाँ प्रेमी अपनी प्रेमिका की कातिलाना अदाओं, मौन और उसकी अनुपस्थिति से उत्पन्न विरह की वेदना को बयां कर रहा है। वह अपनी वफ़ादारी और निश्छल प्रेम को समर्पित करते हुए अपनी भूल जानने की कोशिश करता है, क्योंकि उसका पूरा अस्तित्व अब केवल उसी के इर्द-गिर्द सिमट गया है।
English Translation
This poem beautifully captures the deep and sensitive emotions of love, where the lover expresses the pain of separation caused by the beloved's silence and absence. Dedicated to his loyalty, he seeks to know his mistake while highlighting how his entire existence now revolves solely around her enchanting presence.