मिलकर तुमसे मेरे दिल को वो सुकून मिला

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मिलकर तुमसे मेरे दिल को वो सुकून मिला, मेरी ज़िन्दगी की लौ को रूहानी नूर मिला। बिना शर्त के जब तेरा इस्तिक़बाल किया, तेरी ख़ुशी में ख़ुशी और ग़म में भी सुकून मिला। तेरे आँचल में ढलती हुई हर शाम में, मेरे उदास दिल को इक नया जुनून मिला। मयखानों से वास्ता न है, न कभी रहा, मुझे तो सिर्फ आपकी आँखों से सुरूर मिला। तुमसे मिलकर छँट गया ग़मों का साया ऐसे, जैसे बरसों की इबादत से कोई नूर मिला। 'गौरव' ने ग़ज़ल में जब भी तेरा नाम लिखा, हर लफ़्ज़ में तेरा अक्स और जुनून मिला।
यह कविता सच्चे प्रेम से मिलने वाले गहरे सुकून और आध्यात्मिक बदलाव को खूबसूरती से दर्शाती है। कवि व्यक्त करता है कि कैसे प्रियतम को बिना किसी शर्त के स्वीकार करने से जीवन के सारे दुख दूर हो जाते हैं। प्रेम की यह पावन अनुभूति उदास मन में एक नई ऊर्जा, ईश्वरीय प्रकाश और परम तृप्ति का संचार करती है।
This poem beautifully captures the profound peace and spiritual awakening brought by true love. It illustrates how unconditional acceptance of the beloved transforms sorrow into joy, infusing a weary soul with divine light, inspiration, and an intoxicating sense of contentment.
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