तुम आज के दौर के लड़के हो
तुम आज के दौर के लड़के हो,
तुम्हें कई पुरानी दीवारें गिरानी हैं।
माँ की थकती आँखों की नमी पढ़नी है,
और पापा के शब्दों की लाज निभानी है।
लड़कियों के हक़ के लिए आवाज़ उठानी है,
पर आँखें बंद करके हर बात नहीं माननी है।
जहाँ सच हो, वहाँ डटकर साथ निभाना है,
पर गलत फायदों से खुद को भी बचाना है।
तुम्हें न किसी से ऊपर जाना है,
और न ही किसी से नीचे रहना है।
बस एक अच्छे इंसान की तरह,
कंधे से कंधा मिलाकर कदम बढ़ाना है।
सबका ध्यान रखते हुए खुद को नहीं भुलाना है,
रिश्तों और अपनी इज़्ज़त में तालमेल बिठाना है।
तुम आज के दौर के लड़के हो,
तुम्हें आने वाले कल को और बेहतर बनाना है।
हिंदी भावार्थ
यह कविता आधुनिक युग के पुरुषों को रूढ़िवादी बेड़ियों को तोड़कर एक संवेदनशील, न्यायप्रिय और संतुलित इंसान बनने की प्रेरणा देती है। यह उन्हें महिलाओं के अधिकारों का समर्थन करने के साथ-साथ अपने आत्मसम्मान और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच एक स्वस्थ संतुलन बनाने का संदेश देती है। अंततः, यह कविता पुरुषों को वर्चस्व या हीनता की भावना से मुक्त होकर समानता और संवेदनशीलता के साथ एक बेहतर समाज के निर्माण का मार्ग दिखाती है।
English Translation
This poem inspires modern men to break free from orthodox shackles and become sensitive, just, and balanced human beings. It messages them to support women's rights while maintaining a healthy balance between their self-respect and family responsibilities. Ultimately, the poem guides men to build a better society with equality and sensitivity, free from feelings of dominance or inferiority.