तिरंगा हमारा सब से ऊँचा रहे

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देश का कोई भी गली कूचा रहे तिरंगा हमारा सब से ऊँचा रहे हर किसी के दिल में हो आरज़ू भारत का क़द सबसे ऊँचा रहे मन करे जब कोई नजम गाने का बंदे मातरम् का स्वर ऊँचा रहे ज़मीं पे रहें या चाहे असमाँ में परचम सदा तेरा सबसे ऊँचा रहे करते रहे कर्म मिल कर सब ऐसा हिन्दोस्तान का नाम सदा ऊँचा रहे
यह कविता देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की गहरी भावना को व्यक्त करती है, जहाँ कवि हर नागरिक के दिल में तिरंगे और भारत माता के प्रति सम्मान जगाना चाहता है। इसमें सामूहिक प्रयासों के माध्यम से देश के मान-सम्मान को वैश्विक स्तर पर सर्वोच्च बनाए रखने और 'वन्दे मातरम्' के उद्घोष के साथ एकता के सूत्र में बंधने का आह्वान किया गया है।
This poem expresses a deep sense of patriotism and national pride, where the poet wishes to awaken respect for the tricolor and Mother India in the heart of every citizen. It calls for keeping the nation's honor supreme on a global level through collective efforts and uniting under the resonant chant of 'Vande Mataram'.
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