तू ही तो है
मेरे इश्क़ की सबसे पावन नदी, तू ही तो है,
मेरी रूह की आख़िरी तिश्नगी, तू ही तो है।
क्या झेलम, चिनाब, और रावी, या फिर तावी,
हर इक नीर की बहती सी सादगी, तू ही तो है।
सतलुज, व्यास, गंगा, जमुना या नर्मदा हो,
इन लहरों की मीठी सी रवानगी, तू ही तो है।
कृष्णा, कावेरी, लूनी, चम्बल हो या हो तिस्ता,
हर घाट पे जो गूँजे वो कहानी, तू ही तो है।
लोहित हो, बेतवा, काली, घाघरा या कम्बण,
इन सब में छलकती हुई रवानी, तू ही तो है।
कश्मीर से कन्याकुमारी, दिल्ली, मुम्बई, असम,
हर सम्त मेरे इश्क़ की दीवानगी, तू ही तो है।
मैं तेरा भगीरथ हूँ, और तू है मेरी पूजा,
मेरे दिल के मन्दिर की हर बंदगी, तू ही तो है।
कोई मैला कर दे जो तुझको, तो मैं तड़प जाऊँ,
मेरे अश्कों की, साँसों की ताज़गी, तू ही तो है।
मैं मछली हूँ तेरे ही जल की, निकल के मर जाऊँ,
मेरा अंत भी तू है, और ज़िंदगी, तू ही तो है।
❧
Comments (1)
Join the conversation to share your thoughts.
Log in to comment
Old Hindi Songs
24 Jun 2026
बहुत सुंदर रचना