तेरे संग चाय की आख़िरी चुस्की याद है मुझे।
चाय शायद वैसी ही थी,
चीनी भी उतनी ही,
अदरक भी,
इलायची भी...
बदला तो बस इतना,
कि उसके बाद
हर बार प्याले के सामने
तेरी जगह खाली थी।
लोग पूछते रहे बार बार ,
चीनी कम है क्या?
दूध कम है क्या?
मैं हर बार मुस्कुरा के कहता रहा,
"नहीं... सब ठीक है।"
मगर में उन्हें कैसे बताता,
की फीकी चाय नहीं हुई,
बस तेरे बिना
ज़ायके ने ही घर छोड़ दिया है ।
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