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by Gourav Baloria
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42 poems by Gourav Baloria
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मुझे मुझसे ही मिलने के लिए
मुझे मुझसे ही …
तिरे बिन सनम अब गुज़ारा नहीं
तिरे बिन सनम अ…
तुम आज के दौर के लड़के हो
तुम आज के दौर …
कभी शोरगुल वाले किसी मयखाने
कभी शोरगुल वाल…
बिना तेरे कोई सहारा नहीं
बिना तेरे कोई …
तिरंगा हमारा सब से ऊँचा रहे
तिरंगा हमारा स…
तुम्हारी कमी उतर आती है कमरे में
तुम्हारी कमी उ…
में तुम्हारे शहर आया हूँ, मिलने, आओगी क्या
में तुम्हारे श…
अगर छाँव हमारी है, तो धूप भी हमारी है
अगर छाँव हमारी…
जहालत, बेहुनरी के बाज़ार में, ऐसा हो नहीं सकता था
जहालत, बेहुनरी…
तुम्हारे बाद नहीं, तुम्हारे साथ
तुम्हारे बाद न…
छात्र नदी होते हैं...
student, protest
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