तुम्हें दिल लगाना भी नहीं आता।
छुपाना भी नहीं आता,
जताना भी नहीं आता।
ये कैसा सितम है सनम,
कि दिल दुखाना भी नहीं आता,
और दिल लगाना भी नहीं आता।
निगाहों में मचलती हैं,
हज़ारों अनकही बातें,
मगर होंठों तक उनको,
ले के आना भी नहीं आता।
भँवर में छोड़ रखी है,
मेरी कश्ती मोहब्बत की,
बचाना भी नहीं आता,
डुबाना भी नहीं आता।
हमें तुमसे मोहब्बत है,
भला कैसे कहें तुमसे,
तुम्हें तो मेरी खामोशी,
समझ पाना भी नहीं आता।
उलझ कर रह गए हैं हम,
तेरी इन्हीं अदाओं में,
गले लगना नहीं आता,
और छोड़ जाना भी नहीं आता।
हिंदी भावार्थ
यह कविता प्रेम की उस असमंजस और मौन विवशता को दर्शाती है जहाँ प्रेमी अपने जज्बातों को न तो व्यक्त कर पाता है और न ही छुपा पाता है। प्रियतम की उदासीनता और अनिर्णय की स्थिति हृदय को एक ऐसे भंवर में छोड़ देती है जहाँ न तो पूरी तरह से डूबना मुमकिन है और न ही पार पाना। यह अभिव्यक्ति की कमी और अनकहे जज्बातों के बीच तड़पते दिल की एक बेहद खूबसूरत और दर्दभरी दास्तान है।
English Translation
This poem depicts the dilemma and silent helplessness of love, where the lover can neither express nor hide their emotions. The beloved's indifference and indecisiveness leave the heart in a whirlpool where it is neither possible to sink completely nor to cross over. It is a beautiful yet painful tale of a heart yearning amidst a lack of expression and unspoken feelings.