हर इक नज़ारे में देखो ख़ुदा का साया है

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हर इक नज़ारे में देखो ख़ुदा का साया है, ये ज़िंदगी का नया मौसम क्या रंग लाया है। गुलों की शाख़ पे पत्तों का आज मेला है, महकती कलियों का जादू क्या रंग लाया है। हवा में झूमते पेड़ों की वो हँसी सुन लो, परिंदों का ये तराना क्या रंग लाया है। पुकारता है कोई दूर से हमें 'उस्ताद', नज़र की प्यास में ये दिल क्या रंग लाया है। अभी तो धूप थी आँगन में, शाम ढलने को, ये आसमाँ का नज़ारा क्या रंग लाया है। निगाह-ए-यार की वो इक अदा जो देखी थी, उसी के बाद से हर पल क्या रंग लाया है। घरों में आज है होली का ये अनोखा समाँ, गुलाल-ए-इश्क़ ये दिल पे क्या रंग लाया है। नया है दौर ये ज़ाहिर में और बातिन में, हर इक तरफ़ ये तमाशा क्या रंग लाया है।

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