तुम्हारे बाद नहीं, तुम्हारे साथ
तुम मिली,
तो ऐसा नहीं हुआ
कि दुनिया बदल गई।
सड़कें वही रहीं,
मौसम वही रहे,
लोग भी वैसे ही रहे।
बदला तो बस इतना...
कि अब
हर जगह से
लौट आने का मन करता है।
पहले घर
सिर्फ़ एक पता हुआ करता था।
अब...
घर लगता है।
मैंने तुम्हें
कभी अपनी ज़िंदगी नहीं कहा,
क्योंकि
ज़िंदगी एक दिन
ख़त्म हो जाती है।
मैंने तुम्हें
अपनी आदत भी नहीं कहा,
आदतें
वक़्त के साथ
बदल जाती हैं।
मैंने तुम्हें...
अपनी ख़ामोशी कहा है।
जिसे हर कोई
सुन नहीं सकता,
मगर जिसके बिना
मैं पूरा नहीं होता।
तुम्हें मालूम है,
मोहब्बत का सबसे ख़ूबसूरत हिस्सा
"आई लव यू" कहना नहीं होता।
बल्कि...
किसी थके हुए दिन के आख़िर में,
भीड़ से निकलते हुए
जेब से फ़ोन निकालना,
और बिना सोचे
सबसे पहले
तुम्हारा नाम ढूँढ़ना होता है।
या फिर...
घर लौटते हुए
अचानक तेरा ख़याल आना,
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