अब दोबारा उडने के काबिल नहीं रहा हूँ में
तुझसे जुदा हो के खुद का ही नहीं रहा हूँ में
खुद में होकर भी खुद का ही नहीं रहा हूँ में
इक छोटी सी उड़ान भरी और बिखर गया में
अब दोबारा उडने के काबिल नहीं रहा हूँ में
दीद के काबिल हंसी तो बहुत है यंहा मगर
किसी और दीदार के काबिल नहीं रहा हूँ में
अंदर दफनाए बैठा हूँ राज तेरे किस्सों के में
और किस्से सुनने के काबिल नहीं रहा हूँ में
छोड़ दिया लिखना तेरे आखरी किस्से के बाद
और किस्से लिखने के काबिल नहीं रहा हूँ में
साथ था तेरे कुछ पल जुर्म-ए-इश्क़ ख़राबे में
अब और से इश्क़ के काबिल नहीं रहा हूँ में
रहने दिए खाली बचे पन्ने मेरी जिंदगी के मैंने
अगला पन्ना पलटने के काबिल नहीं रहा हूँ में
सोचा याद कर लूँ खुद को आखिरी बार मगर
खुद को याद करने के काबिल नहीं रहा हूँ में
हिंदी भावार्थ
यह कविता प्रेम में मिले गहरे आघात, विरह की वेदना और उसके बाद उपजे खालीपन को दर्शाती है। कवि अपने प्रियतम से अलग होने के बाद पूरी तरह टूट चुका है और उसमें अब दोबारा किसी से प्रेम करने, जीवन में आगे बढ़ने या नई शुरुआत करने की हिम्मत नहीं बची है। वह अपनी बची हुई जिंदगी को एक अधूरे पन्ने की तरह छोड़ चुका है, जहाँ अब केवल अतीत की यादें और मौन शेष है।
English Translation
This poem depicts the deep trauma of heartbreak, the pain of separation, and the resulting emptiness. After parting from his beloved, the poet is completely shattered and lacks the strength to love again, move forward, or make a new beginning in life. He has left the remaining chapters of his life blank, where only past memories and silence now remain.