मैंने दिल के हुजरे में तेरी तस्वीर बना ली है
मैंने दिल के हुजरे में तेरी तस्वीर बना ली है,
तुमने ही दरमियाँ इक लकीर बना ली है।
चंद मीठे बोल क्या बोले तूने इन फासलों से,
मैंने उसी धोखे की एक तक़दीर बना ली है।
मेरी सच्ची वफ़ा तेरे लिए बस वक़्त गुज़ारी है,
तूने मेरे जज़्बातों से इक जागीर बना ली है।
ना तू अपनाता है मुझको, ना ही ठुकराता है मुझे,
तेरे इस भरम ने इश्क़ की तासीर बना ली है।
जानता हूँ कि मुकम्मल नहीं हो सकता ये रिश्ता,
मैंने खुद ही अपने पैरों की ज़ंजीर बना ली है।
हक़ीक़त में तू पास नहीं, ये खबर है इस दिल को,
तेरी झूठी बातों की मैंने ताबीर बना ली है।
तेरी ये बेरुखी और दूरियाँ हर पल जान लेती हैं,
तेरी अनदेखी ने मेरे लिए शमशीर बना ली है।
तू भी चुप है और 'गौरव' भी तड़पने को राज़ी है,
इस उलझे हुए रिश्ते ने कैसी नज़ीर बना ली है!
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