तुम्हारी कमी उतर आती है कमरे में

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ये रात जब चुपचाप मेरी खिड़की पर आकर बैठती है, चाँद नहीं, तुम्हारी कमी उतर आती है कमरे में। कितनी बातें हैं जो किसी से कह नहीं पाया, उन्हें मैंने दिल की तहों में, तुम्हारे इंतज़ार में सँभाल रखा है। जिस दिन तुम मिलोगी, मैं किसी शिकायत से शुरुआत नहीं करूँगा। बस तुम्हारे पास बैठकर अपनी हर सुबह का हिसाब दूँगा, हर शाम का अकेलापन सुनाऊँगा, और वो सारे किस्से जो सिर्फ़ तुम्हारे सुनने के लिए बचे हैं। तुमसे मोहब्बत किसी वादे की वजह से नहीं है, ये तो उस साँस की तरह है जिसका एहसास तब होता है जब वो कुछ पल के लिए रुक जाए। तुम्हें पाने की चाह में मैंने दुनिया से ज़्यादा खुद को समझाना सीखा है। इसलिए अगर कभी मेरे लफ़्ज़ तुम्हें चुभने लगें, तो समझ लेना... दिल कहना कुछ और चाहता था, ज़ुबान रास्ता भटक गई। मैं तुम्हारे एहसास को कभी खेल नहीं बनाऊँगा। मोहब्बत अगर सच हो, तो उसे जीतने की नहीं, निभाने की ज़रूरत होती है। लंबे सफ़रों से अब डर नहीं लगता, डर तो सिर्फ़ उस मंज़िल का है जहाँ पहुँचकर तुम साथ न हो। काश... तुम मेरे सफ़र का सिर्फ रास्ता नहीं, उस रास्ते की मंजिल भी बन जाओ। मेरा हाथ पकड़ो तो यूँ पकड़ना कि उम्र भर किसी मोड़ पर छूटने का ख़याल भी न आए। और अगर कभी ज़िंदगी हमें दूर-दूर खड़ा कर दे, तो इतना याद रखना... मैं तुम्हें याद करने के लिए कोई वजह नहीं ढूँढूँगा, क्योंकि कुछ लोग याद नहीं किए जाते, वे धड़कनों में बसते हैं। तुम्हें भूल जाना मेरे बस की बात नहीं। क्योंकि तुम्हारा नाम अब मेरी यादों में नहीं, मेरी आदतों में लिखा है।
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