मुझे मुझसे ही मिलने के लिए
बिखर जाता हूँ अंदर से तो थोड़ा संभलना पड़ता है
मुझे मुझसे मिलने के लिए उससे मिलना पड़ता है
जब दफ़्तर में हो या दूर शहर में घर सूना लगता है
रोज तन्हाई में कुर्बत की आग से जलना पड़ता है
मैं दुनिया-दारी के नाटक नखरे अकेले झेल पाऊँ
इसके लिए दिन रात कई साँचों से ढलना पड़ता है।
आस-पास जब कोई ग़लती से ले दे नाम उसका
जज़्बात छुपाने के लिए मुझे रस्ता बदलना पड़ता है।
यूँ तो है मोम सा दिल है मेरा पर उस की ख़ातिर
मुझे अपने जज़्बातों को दिल में रखना पड़ता है
बना है दोस्ती और प्यार से ये जो रिश्ता अपना
वो ज़िद पे अड़ जाए तो मुझे पिघलना पड़ता है
वो रूठे तो घर की हर चीज़ उदास लगती है
उसकी एक हँसी के लिए मुझे हँसना पड़ता है
बिना उसके तो साँसें भी ठहर जाती हैं सीने में
मुझे ज़िंदा रहने के लिए उसके पास रहना पड़ता है
हिंदी भावार्थ
यह कविता प्रेम की गहन पराकाष्ठा और उसमें निहित समर्पण को दर्शाती है, जहाँ कवि अपने अस्तित्व की पूर्णता के लिए अपने प्रिय पर निर्भर है। दुनिया के थपेड़ों और अकेलेपन से जूझते हुए, वह अपने सच्चे स्वरूप को केवल अपने प्रिय के सानिध्य में ही पा सकता है। यह रचना दर्शाती है कि कैसे प्रेम में व्यक्ति अपनी खुशियों और जज्बातों को प्रिय की मुस्कान और सहमति के लिए समर्पित कर देता है।
English Translation
This poem depicts the profound heights of love and the inherent surrender within it, where the poet relies on their beloved to achieve a sense of completeness in their own existence. Struggling against the trials of the world and loneliness, they can only find their true self in the company of their beloved. The work illustrates how, in love, one sacrifices their own happiness and emotions just to ensure the beloved's smile and contentment.