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by Gourav Baloria
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Original Hindi Kavita & English Poetry
185 poems by Gourav Baloria
विषय के अनुसार पढ़ें:
प्रेम और मोहब्बत
विरह और दर्द
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ना गजरे की बहार
ना गजरे की बहार
राति ने लंबियाँ, निंद्रा अखियां तों होई गेइयां दूर
Folk Himachali Song
मैं नशे में हूँ
मैं नशे में हूँ
शंभू... मेरे शंभू...
शंभू... मेरे श…
ऐ चाँद, कुछ देर में तुझे घने बादल ढक लेंगे
ऐ चाँद, कुछ दे…
एक की मर्ज़ी पर घर गिराना पड़ा
एक की मर्ज़ी प…
मुझे मुझसे ही मिलने के लिए
मुझे मुझसे ही …
तिरे बिन सनम अब गुज़ारा नहीं
तिरे बिन सनम अ…
तुम आज के दौर के लड़के हो
तुम आज के दौर …
कभी शोरगुल वाले किसी मयखाने
कभी शोरगुल वाल…
बिना तेरे कोई सहारा नहीं
बिना तेरे कोई …
तिरंगा हमारा सब से ऊँचा रहे
तिरंगा हमारा स…
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