तेरी सूरत के सिवा कुछ और अच्छा नही लगता

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दूरियों का बढ़ जाना तेरे बिना सांसो का आना तेरी इबादत बगैर जिये जाना अच्छा नही लगता तेरा एक पल को आना पल मे ओझल हो जाना तेरी सूरत के सिवा कुछ और अच्छा नही लगता मेरा तेरा ख्वाव सजाना फिर उसका टूट जाना मेरा आँसू छुपा के मुस्कुराना अच्छा नही लगता तेरा पुतलियों को घूमना, फिर पलकों से छुपाना झुका कर पलकें नहीं उठाना, अच्छा नही लगता वादा करके तेरा नहीं आने का हर एक बहाना यूँ ही मौसमों का गुजर जाना अच्छा नही लगता तेरा रोज संवर कर सपनों में आकर मुझे जगाना फ़िर मेरी नींद का टूट जाना अच्छा नही लगता बस अच्छा लगता है तो तेरा प्यार से मुझे बुलाना, मेरे गालों पर हाथ लगाना बालों में हाथ घुमाना और तेरा मेरे कंधे पर सर रख कर सो जाना
यह कविता प्रेम की गहरी तड़प, विरह की वेदना और प्रियतम के प्रति अनन्य समर्पण को दर्शाती है। कवि अपने प्रिय के बिना हर खुशी को अधूरा पाता है और सपनों के टूटने व झूठे वादों के दर्द को बयां करता है। अंततः, प्रियतम का सामीप्य, उनका स्पर्श और उनके कंधे पर सिर रखकर सो जाना ही जीवन का एकमात्र सच्चा सुख और सुकून है।
This poem beautifully depicts the intense longing of love, the pain of separation, and absolute devotion to the beloved. The poet finds every joy meaningless without their beloved, expressing the grief of shattered dreams and unfulfilled promises. Ultimately, the only true solace and happiness lie in the beloved's gentle touch, their loving presence, and the comfort of them resting their head on the poet's shoulder.
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