तेरी सूरत के सिवा कुछ और अच्छा नही लगता
दूरियों का बढ़ जाना तेरे बिना सांसो का आना
तेरी इबादत बगैर जिये जाना अच्छा नही लगता
तेरा एक पल को आना पल मे ओझल हो जाना
तेरी सूरत के सिवा कुछ और अच्छा नही लगता
मेरा तेरा ख्वाव सजाना फिर उसका टूट जाना
मेरा आँसू छुपा के मुस्कुराना अच्छा नही लगता
तेरा पुतलियों को घूमना, फिर पलकों से छुपाना
झुका कर पलकें नहीं उठाना, अच्छा नही लगता
वादा करके तेरा नहीं आने का हर एक बहाना
यूँ ही मौसमों का गुजर जाना अच्छा नही लगता
तेरा रोज संवर कर सपनों में आकर मुझे जगाना
फ़िर मेरी नींद का टूट जाना अच्छा नही लगता
बस अच्छा लगता है तो तेरा प्यार से मुझे बुलाना,
मेरे गालों पर हाथ लगाना बालों में हाथ घुमाना
और तेरा मेरे कंधे पर सर रख कर सो जाना
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