ज़िंदगी की हर साँस तुझपे वार दूँ,

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ज़िंदगी की हर इक साँस तुझपे वार दूँ, मरते दम तक तुझे बे-पनाह प्यार दूँ। तू मुझे गर अकेला भी कर दे कभी, तुझपे फिर भी मैं अपनी जाँ हार दूँ। तेरी शर्तें सभी मान कर हमसफ़र, मुस्कुरा कर तुझे अपना संसार दूँ। सोहणेया तेरी हँसी में ही मेरी जान है, तेरे सदके मैं अपना हर क़रार दूँ। थक के लौटूँ जो मैं शाम को तेरे पास, हक़ की दौलत से ख़ुशियों का घर-बार दूँ। रूखी-सूखी जो मिल जाए तेरी सँगत, उस निवाले को दावत सा ख़ुमार दूँ। तेरे हाथों की लकीरों को चूम कर सनम, तेरी हर एक बला को मैं ख़ुद पे वार दूँ। कोई गहना, कोई ज़ेवर नहीं चाहिए, तेरी सादगी को मैं चाहतों का सिंगार दूँ। तू जो हँस दे तो पतझड़ में भी फूल खिलें, तेरे रास्तों पे मैं इश्क़ की बहार दूँ। इस फ़क़ीर के लबों पे है बस तेरा नाम, अपनी आँखों से मैं इश्क़ का इज़हार दूँ।

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