तेरे साथ रहकर ये असर मुझपे हुआ है
उसकी सलामती पे मैंने, दोनों जहान लुटा दिए,
कुबूल होते थे जहाँ सजदे, वंहा मकान लुटा दिए।
ताउम्र जो पाला था, अपनी नेकियों को ज़हन में,
इश्क़ की एक ठोकर ने, वो सारे गुमान लुटा दिए।
सफ़र-ए-इश्क़ का दस्तूर है, रूह का वज़न हल्का रखना,
इसी उसूल की ख़ातिर हमने, 'मैं' के गुमान लुटा दिए।
उसके लिए कभी मेरे लबों पे कोई बद्दुआ न निकले,
इस एक ख़ौफ़ में मैंने, सारे गिले-गुमान लुटा दिए।
उसकी आहट के इंतज़ार में, खुले रहे मेरे दिल के द्वार,
उसे बसाने की ज़िद में, बाकि सारे इम्कान लुटा दिए।
मालूम है दिल को, इस रास्ते पर सिर्फ़ तबाही है,
फिर भी मैंने जुनूँ में, अपने जहान लुटा दिए।
डूबने की तलब पहले से थी "गौरव", फिर तिनके क्या सहारा देते,
हमने साहिल से पहले ही, अपने बचने के सामान लुटा दिए।
हिंदी भावार्थ
यह कविता प्रेम में पूर्ण समर्पण, अहंकार के विसर्जन और प्रियतम की खुशी के लिए सर्वस्व न्योछावर करने की गहन भावना को दर्शाती है। कवि स्पष्ट करता है कि सच्चे प्रेम के मार्ग पर चलने के लिए 'मैं' (अहंकार) और आत्म-बचाव के सभी साधनों को त्यागना अनिवार्य है, भले ही इस मार्ग का अंत पूर्ण विनाश ही क्यों न हो।
English Translation
This poem reflects the profound essence of complete surrender in love, the dissolution of the ego, and sacrificing everything for the beloved's well-being. The poet explains that to walk the path of true love, one must abandon the 'I' (ego) and all means of self-preservation, even if this path leads to ultimate destruction.