हर लफ़्ज़ में तेरी याद पिघलती जाती है
तेरी आवाज़ में जैसे शाम ढलती जाती है
हर लफ़्ज़ में तेरी याद पिघलती जाती है
तेरे होने से दिल में रोशनी सी पलती जाती है
तेरे जाने से जान निकलती जाती है
तेरे बिन ये ज़िंदगी बस यूँ ही चलती जाती है
तेरी आस में मेरी साँस अटकती जाती है
जब तू नहीं तो हर खुशी भी खलती जाती है
दूर रहकर तुझसे आग भड़कती जाती है
हिंदी भावार्थ
यह कविता प्रेम की गहन अनुभूति और विरह की असीम वेदना को दर्शाती है। प्रियतम की उपस्थिति जहाँ जीवन में प्रकाश और सकारात्मकता भर देती है, वहीं उनकी अनुपस्थिति में हर खुशी व्यर्थ लगने लगती है और जीवन केवल एक अंतहीन प्रतीक्षा बन जाता है। यहाँ विरह की तड़प को अत्यंत संवेदनशील और भावुक शब्दों में पिरोया गया है।
English Translation
This poem portrays the deep experience of love and the boundless pain of separation. While the beloved's presence fills life with light and positivity, their absence makes every joy seem futile, turning life into an endless wait. The agony of longing is woven here in highly sensitive and emotional words.