अगर छाँव हमारी है, तो धूप भी हमारी है
अगर आज हार है, तो कल जीत हमारी है,
चुनौतियों से लड़ने की, ये रीत हमारी है।
अगर छाँव हमारी है, तो धूप भी हमारी है,
सफ़र के हर मौसम से, अब प्रीत हमारी है।
मुसीबत के अंधेरों में, जो हाथ थाम ले,
हकीकत में वही हिम्मत, मीत हमारी है।
लाख गहरा हो अंधेरा, डरा नहीं सकता,
उजाले की और चलने की, नीत हमारी है।
हिंदी भावार्थ
यह कविता जीवन के उतार-चढ़ाव को सहजता से स्वीकार करने और हर परिस्थिति में अडिग रहने का संदेश देती है। कवि का मानना है कि सुख और दुख, हार और जीत दोनों ही जीवन के अभिन्न अंग हैं, और सच्ची हिम्मत वही है जो हमें अंधेरे से उजाले की ओर ले जाए। यह रचना विपरीत परिस्थितियों में भी आशावादी बने रहने और संघर्ष को सहर्ष गले लगाने की मानवीय जिजीविषा को रेखांकित करती है।
English Translation
This poem conveys the message of gracefully accepting life's ups and downs and remaining steadfast in every situation. The poet believes that joy and sorrow, defeat and victory are both integral parts of life, and true courage is that which leads us from darkness to light. This work highlights the human resilience to remain optimistic even in adverse circumstances and to embrace struggle with open arms.