Skip to main content
Verse And Books
by Gourav Baloria
Home
Poems
Quotes
Poets
About
2
today
/
586
30d
/
1.5k
total
Poetry
मौलिक हिन्दी कविताएँ और शायरी
185 poems by Gourav Baloria
विषय के अनुसार पढ़ें:
प्रेम और मोहब्बत
विरह और दर्द
All Languages
हिन्दी (Hindi)
English
Latest First
Search
Clear Filters
Archive View
तुम्हारी कमी उतर आती है कमरे में
तुम्हारी कमी उ…
में तुम्हारे शहर आया हूँ, मिलने, आओगी क्या
में तुम्हारे श…
अगर छाँव हमारी है, तो धूप भी हमारी है
अगर छाँव हमारी…
जहालत, बेहुनरी के बाज़ार में, ऐसा हो नहीं सकता था
जहालत, बेहुनरी…
तुम्हारे बाद नहीं, तुम्हारे साथ
तुम्हारे बाद न…
छात्र नदी होते हैं...
student, protest
तू मेरे घर तो आ
तू मेरे घर तो आ
कोई चाँद, कोई वादी, कोई नज़ारा नहीं चाहिए,
कोई चाँद, कोई …
हम खामोश क्यों हैं
हम खामोश क्यों…
और यही सोचते-सोचते...
और यही सोचते-स…
टकरा गए एक बाज़ार में
बाज़ार में
तो भी चाहूँगी हाँ।
इश्क़ सूरत
‹
1
2
3
…
15
16
›