सभी हिंदी कविताएँ

विरह की कविताएँ और दर्द भरी शायरी

बिछड़ने के बाद कुछ बातें याद बनकर रह जाती हैं और कुछ ख़ामोशी में लौटती हैं। यहाँ विरह और खोए हुए साथ के एहसासों पर लिखी कविताएँ हैं। किसी रचना का शीर्षक चुनकर उसे पूरा पढ़ें।

Sad Hindi poems and shayari about separation, heartbreak and memories, written by Gourav Baloria.

6 रचनाएँ · गौरव बलोरिया

राति ने लंबियाँ, निंद्रा अखियां तों होई गेइयां दूर

राती ने लंबियाँ, नींदरान , अखियां तो होई गेइयां दूर, राती ने लंबियाँ, नींदरान, अखियां तो होई गेइयां दूर, तोली-तोली, घरे आई जा, मेरे डोगरेया तू। तोली-तोली, घरे आई जा, मेरे डोगरेया तू। सोचां दिले च मेरे मेरा, ओई के कसूर गेया, सोचां दिले च मेरे मेरा, ओई के कसूर गेया, सस दींदी मिंजो ताणे, सोरा करे नके तू। सारा दिन कम करदियां दी, होई गई लक्के …

पूरी कविता पढ़ें →

एक की मर्ज़ी पर घर गिराना पड़ा

तेरे हिस्से का भी सच छुपाना पड़ा... हम ख़ुश नहीं थे... बताना पड़ा। तेरे हिस्से का भी सच छुपाना पड़ा... दो की मर्ज़ी से रखी थी बुनियाद जो... इक की मर्ज़ी पे घर गिराना पड़ा। तेरे हिस्से का भी सच छुपाना पड़ा... तूने इक साँस में कह दिया था नहीं... ख़ुद को फिर से जीना सिखाना पड़ा। तेरे हिस्से का भी सच छुपाना पड़ा... तेरा जाना तो सबको दिख…

पूरी कविता पढ़ें →

मुझे मुझसे ही मिलने के लिए

बिखर जाता हूँ अंदर से तो थोड़ा संभलना पड़ता है मुझे मुझसे मिलने के लिए उससे मिलना पड़ता है जब दफ़्तर में हो या दूर शहर में घर सूना लगता है रोज तन्हाई में कुर्बत की आग से जलना पड़ता है मैं दुनिया-दारी के नाटक नखरे अकेले झेल पाऊँ इसके लिए दिन रात कई साँचों से ढलना पड़ता है। आस-पास जब कोई ग़लती से ले दे नाम उसका जज़्बात छुपाने के लिए मु…

पूरी कविता पढ़ें →

साहिल पे खड़े, मुझे क्या गम, चले जाना है,

साहिल पे, खड़े मुझे क्या गम, चले जाना है, मैं साँस की आख़िरी किश्ती हूँ, अब डूब जाना है। याद है, पहली मुलाक़ात, वो झिझक, वो मुस्काना, दो अजनबियों का धीरे-धीरे एक जहाँ बन जाना। हाथ थाम कर उम्र बिताने की जो क़सम उठाई थी, राह अब छूट रही है, बस इतना अफ़साना है। साहिल पे, खड़े मुझे क्या गम, चले जाना है, मैं साँस की आख़िरी, किश्ती हूँ, अब डूब…

पूरी कविता पढ़ें →

चेहरे पे उसने एक नया चेहरा सजा लिया

चेहरे पे उसने एक नया चेहरा सजा लिया, सच्चे मेरे ख़ुलूस को खिलौना बना लिया। दिल में नहीं थी चाहत तो कह देते तुम साफ, क्यों झूठे इल्ज़ामों में मुझे फँसा लिया। करते रहे तुम मेरा सिर्फ वक़्त ही ख़राब, महफ़िल में मेरे नाम को रुसवा करा लिया। हम चुप रहे कि प्यार का तमाशा न हो, उसने मुझे ही बेवफ़ा सबको बता लिया। उड़ना था उनको किसी और के आसमान में, बस …

पूरी कविता पढ़ें →

न रूह मिले ना तन मिले, फिर कैसा वो प्यार

सब धरती को कागज़ करूँ, लेखनी हो बनराय सात समुंदर मसि करूँ, प्रेम लिखा न जाय न रूह मिले ना तन मिले, फिर कैसा वो प्यार रूह बिन तन है प्राणहीन, हाड़-माँस का जाल प्रेम खातिर दे दे जान, यह बहुत आसान है सुख-दुख में जो साथ निभाए, वो सच्चा है प्यार रंग-रूप, ज़ात-लिंग, ऊँच-नीच, ना कोई भेद प्यार वो भावना जो दूर करे समाज के भेदभाव आवेग में ए…

पूरी कविता पढ़ें →