Gourav Baloria
Contemporary
Gourav Baloria is the founder of Verseandbooks — a sanctuary for Hindi and English poetry lovers. His verses explore love, longing, solitude, and the quiet beauty of everyday emotions.
क्या आपको Gourav Baloria की रचनाएँ पसंद हैं?
हमारे संस्थापक एवं कवि गौरव बलोरिया (@FakirPoet) की मौलिक शायरी और कविताएँ पढ़ें।
लेखन शैली
Lyrical and introspective. Gourav writes with raw honesty, blending simple Hindi with deep emotional undertones. His style feels personal, like a conversation with the reader.
तो भी चाहूँगी हाँ।
इश्क़ सूरत से नहीं, सीरत से किया है मैंने,
तुम अगर बदल भी गए, तो भी चाहूँगी हाँ।
पूरी मैं भी...
आख़िरी इक सवाल, इश्क़ से थोड़ा आगे, फ़लसफ़ा-ए-मोहब्बत
प्यार मुझसे किया जो, तुम निभा पाओगी क्या?
मैं अगर कम पड़ गया, फिर भी चाह पाओगी क्या?
कमियाँ...
तेरे संग चाय की आख़िरी चुस्की याद है मुझे।
चाय शायद वैसी ही थी,
चीनी भी उतनी ही,
अदरक भी,
इलायची भी...
बदला तो बस इतना,
कि उसके बाद
हर...
साहिल पे खड़े, मुझे क्या गम, चले जाना है,
साहिल पे, खड़े मुझे क्या गम, चले जाना है,
मैं साँस की आख़िरी किश्ती हूँ, अब डूब जाना है।
याद ...
चेहरे पे उसने एक नया चेहरा सजा लिया
चेहरे पे उसने एक नया चेहरा सजा लिया,
सच्चे मेरे ख़ुलूस को खिलौना बना लिया।
दिल में नहीं थी चाहत ...
अब दोबारा उडने के काबिल नहीं रहा हूँ में
तुझसे जुदा हो के खुद का ही नहीं रहा हूँ में
खुद में होकर भी खुद का ही नहीं रहा हूँ में
इक छ...
मोहब्बत नहीं समझते
मैंने आज यूट्यूब में एक वीडियो में यह लाइनें सुनीं, जो कुछ इस तरह थीं
"जब दिल पर किसी की मोहब्...
ज़िंदगी कहाँ इतनी आसान
अब रुक सा जाता हूँ, कुछ करने से पहले,
सोचने लगता हूँ, कुछ कहने से पहले।
ठोकरें खाकर अब, संभलन...
तू ही तो है
मेरे इश्क़ की सबसे पावन नदी, तू ही तो है,
मेरी रूह की आख़िरी तिश्नगी, तू ही तो है।
क्या झेलम...
ज़िंदगी की हर साँस तुझपे वार दूँ,
ज़िंदगी की हर इक साँस तुझपे वार दूँ,
मरते दम तक तुझे बे-पनाह प्यार दूँ।
तू मुझे गर अकेला भी क...