Gourav Baloria
Contemporary
Gourav Baloria is the founder of Verseandbooks — a sanctuary for Hindi and English poetry lovers. His verses explore love, longing, solitude, and the quiet beauty of everyday emotions.
लेखन शैली · Style
Lyrical and introspective. Gourav writes with raw honesty, blending simple Hindi with deep emotional undertones. His style feels personal, like a conversation with the reader.
कविताएँ एवं प्रमुख रचनाएँ (43)
तू ही तो है
मेरे इश्क़ की सबसे पावन नदी, तू ही तो है,
मेरी रूह की आख़िरी तिश्नगी, तू ही तो है।
क्या झेलम, चिनाब, औ...
ज़िंदगी की हर साँस तुझपे वार दूँ,
ज़िंदगी की हर इक साँस तुझपे वार दूँ,
मरते दम तक तुझे बे-पनाह प्यार दूँ।
तू मुझे गर अकेला भी कर दे कभी,
...
शंखपुष्पी पुष्प
शंखपुष्पी पादप है बहुत गुणवान
छोटा सा पुष्प गुण इसके महान
इसके दर्शन को सब मंगल माने
सेवन करके इसक...
एक इशारे पे उसके दिल का दरवाजा खोल सकता है
एक इशारे पे उसके दिल का दरवाजा खोल सकता है
इश्क़ में आशिक़ अपनी बात आखों से बोल सकता है
झुका लेता हूँ ...
तेरी सूरत के सिवा कुछ और अच्छा नही लगता
दूरियों का बढ़ जाना तेरे बिना सांसो का आना
तेरी इबादत बगैर जिये जाना अच्छा नही लगता
तेरा एक पल को आना ...
हर इक नज़ारे में देखो ख़ुदा का साया है
हर इक नज़ारे में देखो ख़ुदा का साया है,
ये ज़िंदगी का नया मौसम क्या रंग लाया है।
गुलों की शाख़ पे पत्तो...
मैंने दिल के हुजरे में तेरी तस्वीर बना ली है
मैंने दिल के हुजरे में तेरी तस्वीर बना ली है,
तुमने ही दरमियाँ इक लकीर बना ली है।
चंद मीठे बोल क्या बोल...
न रूह मिले ना तन मिले, फिर कैसा वो प्यार
सब धरती को कागज़ करूँ, लेखनी हो बनराय
सात समुंदर मसि करूँ, प्रेम लिखा न जाय
न रूह मिले ना तन मिले, फिर ...
घर की पुकार बुलाती है
ये शहर की ऊँची बिल्डिंगे
दिल को नहीं सुहाती है
पहाड़ों की याद आती है
मुझे घर की पुकार बुलाती है
हाँ...
तेरे साथ रहकर ये असर मुझपे हुआ है
उसकी सलामती पे मैंने, दोनों जहान लुटा दिए,
कुबूल होते थे जहाँ सजदे, वंहा मकान लुटा दिए।
ताउम्र जो पाला ...