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Gourav Baloria

Gourav Baloria

Contemporary
Gourav Baloria is the founder of Verseandbooks — a sanctuary for Hindi and English poetry lovers. His verses explore love, longing, solitude, and the quiet beauty of everyday emotions.
लेखन शैली · Style
Lyrical and introspective. Gourav writes with raw honesty, blending simple Hindi with deep emotional undertones. His style feels personal, like a conversation with the reader.

कविताएँ एवं प्रमुख रचनाएँ (185)

बिना तेरे कोई सहारा नहीं
तिरे बिन सनम अब गुज़ारा नहीं, बिना तेरे कोई सहारा नहीं। क़रीब आके नज़रें चुराती हो तुम, मगर दिल को पर्...
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तिरंगा हमारा सब से ऊँचा रहे
देश का कोई भी गली कूचा रहे तिरंगा हमारा सब से ऊँचा रहे हर किसी के दिल में हो आरज़ू भारत का क़द सबसे ऊ...
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तुम्हारी कमी उतर आती है कमरे में
ये रात जब चुपचाप मेरी खिड़की पर आकर बैठती है, चाँद नहीं, तुम्हारी कमी उतर आती है कमरे में। कितनी बाते...
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में तुम्हारे शहर आया हूँ, मिलने, आओगी क्या
में तुम्हारे शहर आया हूँ, मिलने, आओगी क्या, दिल भी साथ लाया हूँ, मिलने, आओगी क्या। टेबल रिज़र्व करा दी,...
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जहालत, बेहुनरी के बाज़ार में, ऐसा हो नहीं सकता था
दिखावे के समंदर में, सुकून खो नहीं सकता, बीज मालूमात का, कोई जी में बो नहीं सकता। किताबें छोड़ दीं, और ...
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अगर छाँव हमारी है, तो धूप भी हमारी है
अगर आज हार है, तो कल जीत हमारी है, चुनौतियों से लड़ने की, ये रीत हमारी है। अगर छाँव हमारी है, तो धूप भी...
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तुम्हारे बाद नहीं, तुम्हारे साथ
तुम मिली, तो ऐसा नहीं हुआ कि दुनिया बदल गई। सड़कें वही रहीं, मौसम वही रहे, लोग भी वैसे ही रहे। बद...
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छात्र नदी होते हैं...
पहाड़ों से उतरते, सपनों से भरे, शोर नहीं करते, बस अपना रास्ता चुनते हैं। जिधर ज्ञान की ज़मीन मिले, उ...
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कोई चाँद, कोई वादी, कोई नज़ारा नहीं चाहिए,
कोई चाँद, कोई वादी, कोई नज़ारा नहीं चाहिए, मुझे किताबी इश्क़ का सहारा नहीं चाहिए। तू न बोले तो रूठ कर ...
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तू मेरे घर तो आ
एक बार कभी फुरसत निकाल कर, तू मेरे घर तो आ, तुझे अपने हाथों की अदरक वाली चाय पिलाऊँगा। हालाँकि, चीनी चा...
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