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Gourav Baloria

Gourav Baloria

Contemporary
Gourav Baloria is the founder of Verseandbooks — a sanctuary for Hindi and English poetry lovers. His verses explore love, longing, solitude, and the quiet beauty of everyday emotions.
लेखन शैली · Style
Lyrical and introspective. Gourav writes with raw honesty, blending simple Hindi with deep emotional undertones. His style feels personal, like a conversation with the reader.

कविताएँ एवं प्रमुख रचनाएँ (43)

अगर छाँव हमारी है, तो धूप भी हमारी है
अगर आज हार है, तो कल जीत हमारी है, चुनौतियों से लड़ने की, ये रीत हमारी है। अगर छाँव हमारी है, तो धूप भी...
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तुम्हारे बाद नहीं, तुम्हारे साथ
तुम मिली, तो ऐसा नहीं हुआ कि दुनिया बदल गई। सड़कें वही रहीं, मौसम वही रहे, लोग भी वैसे ही रहे। बद...
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छात्र नदी होते हैं...
पहाड़ों से उतरते, सपनों से भरे, शोर नहीं करते, बस अपना रास्ता चुनते हैं। जिधर ज्ञान की ज़मीन मिले, उ...
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कोई चाँद, कोई वादी, कोई नज़ारा नहीं चाहिए,
कोई चाँद, कोई वादी, कोई नज़ारा नहीं चाहिए, मुझे किताबी इश्क़ का सहारा नहीं चाहिए। तू न बोले तो रूठ कर म...
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तू मेरे घर तो आ
एक बार कभी फुरसत निकाल कर, तू मेरे घर तो आ, तुझे अपने हाथों की अदरक वाली चाय पिलाऊँगा। हालाँकि, चीनी चा...
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हम खामोश क्यों हैं
हम खामोश क्यों हैं, क्यों हमारी जुबां पर ताले हैं? ज़िंदगी निगलने को यहाँ, खुले मौत के नाले हैं। क...
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टकरा गए एक बाज़ार में
भीड़ से बच निकल रहे थे, और टकरा गए एक बाज़ार में, वक़्त जैसे थम सा गया, उस पहली नज़र के इक़रार में। आजक...
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और यही सोचते-सोचते...
कल रात एक बहुत अजीब सा सपना देखा... एक अनजान सी भीड़ थी, और एक बहुत शोर शराबे वाला बाज़ार। उस भीड़ से बच...
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बरसों के बाद हम जो मिले हैं
बरसों के बाद हम जो मिले हैं, दिल में हज़ारों ख़्वाब खिले हैं। नदियाँ, पहाड़ और वादियां संग देखीं, हम तेर...
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मिलकर तुमसे मेरे दिल को वो सुकून मिला
मिलकर तुमसे मेरे दिल को वो सुकून मिला, मेरी ज़िन्दगी की लौ को रूहानी नूर मिला। बिना शर्त के जब तेरा इस...
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