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आया हूँ शहर की धूल से निकलकर

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।  दूर एक कुत्ता भौंका, फिर शांत हो गया, गली ने चुप्पी ओढ़ ली ऐसे। खिड़की से रातरानी चुपके से आकर, नींद के तकिये के तले बैठ गयी जैसे।
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