हिन्दी blogger hindi-kavita gourav-baloria romantic विषय के अनुसार पढ़ें: प्रेम और मोहब्बत विरह और दर्द आया हूँ शहर की धूल से निकलकर ✍️ Gourav Baloria · 16 Nov 2025 । दूर एक कुत्ता भौंका, फिर शांत हो गया, गली ने चुप्पी ओढ़ ली ऐसे। खिड़की से रातरानी चुपके से आकर, नींद के तकिये के तले बैठ गयी जैसे। साझा करें · Share WhatsApp Facebook X 📋 Copy Link ← पिछली रचना जन्म दिवस है आज तुम्हारा मेरी प्यारी मम्मी जी अगली रचना → गांव के गगन में सिर्फ और सिर्फ उजियारे नज़र आते हैं। Next