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तेरे पास जो दिल है, मेरी मौत की निशानी है

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घर फूंक दिया हमने, अब  राख  बचानी  हैएक दफा हुई गलती, फिर से न दोहरानी है तेरा अक्स उतारने को, आंखों में भरा पानीतुम  ज़ख्म अता कर दो, यह  रीत पुरानी है तेरी तस्वीर मेरे दिल में, आंखों में  इबादत हैतू चाँद है मेरा, तुझे रात कंही और बितानी है उठते धुएँ में तुझे, तेरी  परछाई दिखानी हैतुम बैठे रहो साथ, तुम्हारी तस्वीर बनानी है थोड़ी आग थोड़ा पानी, यह रोज रोज का हैमेरी आँखों का पानी, कहता यही कहानी है नादानी में गौरव ने, यह गजल लिख डाली हैतेरे पास जो दिल है, मेरी मौत की निशानी है
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