फिर से तुझसे मिले बग़ैर चला यह दिसम्बर
इस साल भी उदासियाँ दे चला यह दिसम्बरफिर तुझसे मिले बग़ैर चला यह दिसम्बर
जनवरी में मिलन के ज़िक्र से साँसे महक उठीहरीफ़ों से अकेले में लड़ता चला यह दिसंबर
महसूस होता है तुम्हारा स्पर्श जैसे मई की गर्मीसर्द तासीर में अकेला सुलगता चला यह दिसंबर
सर्द ठिठुरी हुई किसी कोने में शुष्क हवा सामुझपे बर्फ की चादर बिछा चला यह दिसंबर
चाँद रात में हमें डसता है और दिन में सूरजदिलबर का पता बताये बग़ैर चला यह दिसंबर
मुझसे पूछो कभी तकमील न होने की चुभनजब आई जनवरी तो ख़त्म हो चला यह दिसंबर