पापा
गर कभी मिले अकेलापन तो पापा भी रोते है
पर सबके सामने आँखों में आँसूं नही होते है
कभी उनके चेहरे की खुशियों पर मत जाना
उनके दर्द तो अक्सर उनके दिल में दबे होते है
इसलिए लुटाते है परिवार पर अपना सब कुछ
क्योंकि उनके हाथ जिमेदारियों से बंधे होते है
उजरत नही मिलती उनको बोझा ढोने की
इसलिए पापा के पहरन मैले और घिसे होते है
ख़ुशियाँ ही नही अजिय्यत भी मिलती है साथ
पापा कहलाने के बहुत कठिन इम्तेहान होते है
मम्मी घर के अंदर धो सके अपने कपड़े बर्तन
इसलिये पापा घर के बाहर जूठे बर्तन धोते है
तकलीफ भी होगी तो भी कहेंगें सब ठीक है
पापा अंदर घुट कर अक्सर अकेले में रोते है