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अच्छा था

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मैनें रात जो शेर लिखा उसको अच्छा थाउसने खुद फोन पे मुझसे कहा अच्छा था तेरे हुस्न से रंगीन हर शेर मेरी गजल कीतेरे गीत में भी होता नाम मेरा अच्छा था कितनी महोब्बत से तुमने मेरा माथा चूमामाथे पर तेरी सुर्खी का निशान अच्छा था तू आई तो जिंदगी भी लौट कर आ गयीतेरी गली से तो मौत भी आती अच्छा था बादल सागर पर्वत पेड़ परिंदे सब ने कहा तेरी चाहत का जो फुल खिला अच्छा था सब सुनते है किस्से तेरे मेरे कान लगा केदिल की बात दिल में रहती तो अच्छा था डराती है पर कभी काटती नही तेरी जुल्फेंऐसे जिंदा रहने से तो मर जाता अच्छा था 
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