दिल की बात वो समझ लेंगें
जिससे कहना था कह दिया अब वो समझ लेंगें
मेरे सफीने में बैठ गए है जो अब वो समझ लेंगे
दिल टूटा नही जब तक किताबों में ढूंढा करते थे
महोबत क्या है बिना किताब अब वो समझ लेंगें
दिल का ऐतबार न करना सुन कर हँसते थे जो
अपने दिल की करने लगे है अब वो समझ लेंगें
बहुत मासूम दिल जले उनके जिना के जुर्म से
सबसे इश्क़ खाना खराब है अब वो समझ लेंगें
जो देते थे ताने माँ बाप को गरज पूरी न होने पे
कमाने लगे है बच्चे हिसाब अब वो समझ लेंगें
गौरव आज जो हमसे बेपनाह हिजाब रखते है
नजर मिल जाये तो दिल की बात वो समझ लेंगें