हिन्दी blogger hindi-kavita gourav-baloria romantic विषय के अनुसार पढ़ें: प्रेम और मोहब्बत विरह और दर्द तुझसे मिलने की ✍️ Gourav Baloria · 09 Jun 2025 बड़ी मुद्दत से दिल ने कोशिश की है सँभलने की,अब भी इक ख़्वाहिश ज़िंदा है तुझसे मिलने की। कई शामें बिता दी मैंने चलते हुए तेरी यादों में, मेरे पांव ने मुझसे पूछ ली थी राह मिलने की। साझा करें · Share WhatsApp Facebook X 📋 Copy Link ← पिछली रचना तुझसे बात होती रहे अगली रचना → तरीके बदले हैं, इश्क़ नहीं Next