किसी से पहली नज़र का प्यार हुआ है क्या
सोचा हुआ हो जैसा वैसा कभी हुआ है क्या ग़म कभी सागर-ए-शबाब से कम हुआ है क्या
तुझे हुआ क्या है दिल बता न चैन है न करार किसी से पहली नज़र का प्यार हुआ है क्या
सुनाई है मेरी सारी शेर-ओ-शरियाँ ग़ज़लें तुझेंउनमें तेरे सिवा किसी का ज़िक्र हुआ है क्या
आँखों के दरीचे में दिए सा टीमटिमाता हुआ तेरी आंखों में कोई ख़्वाब छुपा हुआ है क्या
क्यों न कहूँ याद करेंगे तुझे अपनी हर साँस में चेहरे पर ज़ाहिर है जो उसे छुपाने से कुछ हुआ है क्या