कभी जब तुम से मुलाक़ात होगी
कभी जब तुम से मुलाक़ात होगीबड़े प्यार से प्यार की बात होगी
चाँद हो रहा होगा रोशन छत परऔर धूप चोखट पे ढल रही होगी
यही सोच-२ कर गुजरता है दिनतूँ मेरे वास्ते सज संवर रही होगी
पायल लाया हूँ उसे पहनाऊँ कैसेउसके पैर पे मेहँदी लगी रही होगी
आने में उसको वक़्त लग रहा हैवो अभी भी सज संवर रही होगी
और कुछ मिलेगा नही मेरे बक्से में होगी तो उसकी ईक तस्वीर होगी