मेरी ज़िन्दगी की लौ को रूहानी नूर मिला।
मुलकर तुमसे मेरे दिल को वो सुकून मिला,
मेरी ज़िन्दगी की लौ को रूहानी नूर मिला।
बिना शर्त के जब तुझे इस्तिक़बाल किया,
तेरी ख़ुशी में ख़ुशी और ग़म में सुकून मिला।
तेरे आँचल पे अवसान होती हर शामों में,
मेरे उदास दिल को इक नया जुनून मिला।
मय मयखानों से न वास्ता है न कभी रहा
मुझे सिर्फ आपकी आँखों से सुकून मिला
तुमसे मिलके दूर हुआ मेरा साया-ज़दा ऐसे
जैसे बरसों की साधना से रूहानी नूर मिला
‘गौरव’ ने कविता में जब तेरा नाम लिखा,
हर अक्षर में तेरा अक्स और जुनून मिला