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यह शहर की ऊँची बिल्डिंगे

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ये शहर की ऊँची बिल्डिंगे  दिल को नहीं सुहाती है पहाड़ों की यादें आती है मुझे घर की पुकार बुलाती है हाँ घर की पुकार बुलाती है शहर की इस भीड़ में खो गया हूँ  अपने परिवार से दूर हो गया हूँ  मां की ममता, वो यादें पुराणी  सुननी है मुझे वो उनकी कहानी  हाँ घर की पुकार बुलाती है  शहर की ऊँची इमारतों में  दिल ढूंढता हिमाचली राहों को  रंग बिरंगी रौशनी में मशग़ूल  पहाड़ों की गोद में चैन मिलता मेरा मन वही पे है बस्ता 
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