काबिल नहीं रहा हूँ में
तुझसे जुदा हो के खुद का ही नहीं रहा हूँ में खुद में होकर भी खुद का ही नहीं रहा हूँ में
इक छोटी सी उड़ान भरी और बिखर गया में अब दोबारा उडने के काबिल नहीं रहा हूँ में
दीद के काबिल हंसी तो बहुत है यंहा मगर किसी और दीदार के काबिल नहीं रहा हूँ में
अंदर दफनाए बैठा हूँ राज तेरे किस्सों के में और किस्से सुनने के काबिल नहीं रहा हूँ में
छोड़ दिया लिखना तेरे आखरी किस्से के बाद और किस्से लिखने के काबिल नहीं रहा हूँ में
साथ था तेरे कुछ पल जुर्म-ए-इश्क़ ख़राबे मेंअब और से इश्क़ के काबिल नहीं रहा हूँ में
रहने दिए खाली बचे पन्ने मेरी जिंदगी के मैंने अगला पन्ना पलटने के काबिल नहीं रहा हूँ में
सोचा याद कर लूँ खुद को आखिरी बार मगर खुद को याद करने के काबिल नहीं रहा हूँ में