हिन्दी blogger hindi-kavita gourav-baloria romantic विषय के अनुसार पढ़ें: प्रेम और मोहब्बत विरह और दर्द दो मुक्तक ✍️ Gourav Baloria · 03 Nov 2021 है बेख़बर वो अपने खुदा से मगरजी रहे है दूसरों के हाथ देखकरपंडित ओलिया पादरी सब एक हैवे खुश है अपना क़िरदार बेचकर करके कड़ी मेहनत दिन ओर रातपास कर गए नोकरी के इम्तेहानबाबू आ गए दबाने गरीब का गलापैसे के घर अपना ईमान बेचकर साझा करें · Share WhatsApp Facebook X 📋 Copy Link ← पिछली रचना इक शाम तुझे याद आएंगे अगली रचना → चला गया Next