हिन्दी blogger hindi-kavita gourav-baloria romantic विषय के अनुसार पढ़ें: प्रेम और मोहब्बत विरह और दर्द फूल पेड़ से टूटकर ख़ामोश मुस्कुराता रहा, ✍️ Gourav Baloria · 28 Sep 2025 फूल पेड़ से टूटकर ख़ामोश मुस्कुराता रहा, पैरों तले कुचलकर भी ख़ुशबू उड़ाता रहा। मिट्टी में मिल गया, हौसले को सीने में रखकर, मिट्टी में आसमा छूने का सपना सँजोता रहा। फिरकोंपलबनमिट्टीकासीनाचीरनिकलाख़िज़ाँसेगुज़रकरभीजीवनसँवरतारहा। साझा करें · Share WhatsApp Facebook X 📋 Copy Link ← पिछली रचना मेरी ज़िन्दगी की लौ को रूहानी नूर मिला। अगली रचना → वो अदा कौन सी है Next