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Gourav Baloria

Gourav Baloria

Contemporary
Gourav Baloria is the founder of Verseandbooks — a sanctuary for Hindi and English poetry lovers. His verses explore love, longing, solitude, and the quiet beauty of everyday emotions.
लेखन शैली · Style
Lyrical and introspective. Gourav writes with raw honesty, blending simple Hindi with deep emotional undertones. His style feels personal, like a conversation with the reader.

कविताएँ एवं प्रमुख रचनाएँ (185)

बस इक तू ही आया नही
इक तू ही आया नहीसबसे मिलते रहे रोजबस इक तू ही आया नही बातें करता रहा सबसे रात भर मगरबात दिल की किसीको बता प...
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कुछ बातें
मेरी बहुत सी बातों का तेरे सिवा किसी और से जिक्र नही होताअच्छा बुरा सच्च झूठ तेरे से शुरूतेरे पर आके खत्म ह...
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मुझपे ही मरता है वो
मेरी हर एक जिद को पूरा करता है वोलाख मना करके भी मुझपे मरता है वो दुनिया ने लाख जतन करे उसे पाने केदुनिया स...
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कुछ कर कुछ कर
कर दिया क्या जादू तूने मुझपरदिल मेरा पल पल बोले कुछ कर कुछ कर कुछ कर।1। बैचेन हो मेरे नैन जबदूर मुझसे तू जा...
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दिल तो दे चुके थे रूह भी उनके नाम कर रहे है
उनके होठों पे रखके होंठ बातें तमाम कर रहे हैदिल तो दे चुके थे रूह भी उनके नाम कर रहे है उनसे मेरा जरूर रिश्...
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अज्ञात
जो ख़ुद का घर छोड़ करतेरे से मिलने को आया हूँऔर तुम मुझे यह कहते होदुनिया से छुप कर हूँ तेरादुनिया के सामने प...
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तेरे शहर में दिलों को तोड़ना सरेआम था
छल कपट चाल साजिश आपका एहसान थाआपसे मिलने से पहले में तो सरल इंसान था बात बात पे बात से मुकरना तो तूने सिखाय...
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वो खंडर मकान मेरे हिस्से आया
कभी खोया कभी पाया, केवल  कतरा  मेरे हिस्से आया में बड़ा भाई क्या हुआ, वो खंडर मकान मेरे हिस्से आया जुगनुओं म...
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तेरे पास जो दिल है, मेरी मौत की निशानी है
घर फूंक दिया हमने, अब  राख  बचानी  हैएक दफा हुई गलती, फिर से न दोहरानी है तेरा अक्स उतारने को, आंखों में भर...
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पहाड़ों में रहने वाला, पहाड़ी भी नही कह पाता हूँ
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