हिन्दी blogger hindi-kavita gourav-baloria romantic विषय के अनुसार पढ़ें: प्रेम और मोहब्बत विरह और दर्द अज्ञात ✍️ Gourav Baloria · 11 Jun 2022 जो ख़ुद का घर छोड़ करतेरे से मिलने को आया हूँऔर तुम मुझे यह कहते होदुनिया से छुप कर हूँ तेरादुनिया के सामने पराया हूँकभी देखना अपनी तस्वीरेंउसमें जो तेरी परछाई हैऔर फ़िर उकेरना उसकेचेहरे को ओर रंग भरनाउस से जो उभर कर आएगामें तेरा वो अज्ञात साया हूँ साझा करें · Share WhatsApp Facebook X 📋 Copy Link ← पिछली रचना कुछ कर कुछ कर अगली रचना → दिल तो दे चुके थे रूह भी उनके नाम कर रहे है Next