तेरे शहर में दिलों को तोड़ना सरेआम था
छल कपट चाल साजिश आपका एहसान थाआपसे मिलने से पहले में तो सरल इंसान था
बात बात पे बात से मुकरना तो तूने सिखायाऐलान-ए-महोबत के वक़्त तू मुझे कुरान था
दिल की नजाकत को तुम कैसे जान पाओगेतेरे शहर में दिलों को तोड़ना सरेआम था
ये न मिलना क्या तेरी एहसान, बेवफ़ाई नहींमुझे अकेलेपन का नही मालूम अंजाम था
भला कब तक हाथ फैलता कोई उसके आगेवो थोड़ी कोई मेरे इकलौते का भगवान था