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बस इक तू ही आया नही

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इक तू ही आया नहीसबसे मिलते रहे रोजबस इक तू ही आया नही बातें करता रहा सबसे रात भर मगरबात दिल की किसीको बता पाया नही इस तरह से आँख खोल केखोया रहा ख्यालों में उसकेचाँद आया खिड़की पे मेरीमगर में उसको देख पाया नही कुछ देर बाकी हैअब भी सुबह आने कोतेरे आने की आस लेकररात भर में सो पाया नही तब से गया है छोड़ के मुझेपड़ी जीवन में अंधेरी रात थीअमावस को छोड़ के गया हुआपूनम को भी वापिस आया नही
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