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एक समंदर मेरे अंदर है

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कुछ राज दिल में छुपाये बैठा हूँ एक समंदर है उफान मारता जोमें उस तूफ़ान को दबाए बैठा हूँ है परवाह सबको सिर्फ़ अपनी-2में अपनी दुकान लुटाये बैठा हूँ  इंसान नहीं बस चाल बदलती हैमें सीखने को ढाल बनाये बैठा हूँ मालूम है सच लगता है ज़हर यहाँइसलिए अपने होंठ दबाए बैठा हूँ मैंने इश्क़ में सहूलियत दी इतनीउस के सारे फ़रमान उठाये बैठा हूँ देख ले गुजरने वाला शक्स ख़ुद कोसर-ए-राह में आईना लगाये बैठा हूँ
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