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राम भक्त

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यहाँ वहाँ से सुन सुन कर कुछ कुछ चुन लाता हूँसिया राम कुल का वारिस इक कथा आपको सुनाता हूँ आज राम भक्त जो बने मतवाले हैगुण राम के अपने अंदर ईक न पाले हैकलयुग के यह तथा कथित राम भक्त माँस मदिरा और हवस के दीवाने हैन पड़ी रामायण इन्होंने है न इनमें किसने राम को जाना हैयह घाट घाट का ज्ञान पाने वालेहुए अपनी सनक में हुए मतवाले हैभ्रम भक्ति का यह अपने अंदर पाले है करुणा दया भक्ति सत्य सदाचारधर्म और मर्यादा का बोध होता रावण के दस सिरों को अपने अंदर मारने में न इनको कोई अबोध होतासहन कर पाते बुराई राम की भी जब प्रतिमा छोड़ हृदय में भीइनके राम का निवास होतान हिंसा होती न होता झगड़ा फ़सादअगर इन्होंने राम को पढ़ा होता अस्तित्व के नाम पे नफ़रत करने वालेधर्म की आड़ में रक्त बहाने वालेयह क्या जाने क्या थे क्या हो गये है रामख़ुद को अंश राम का कहने वाले औरक्षमा, दया, तप, आत्मज्ञान और मनोबलको छोड़ बातें हिंसा की यह करने वालेआज राम भक्त बन फिर रहे मतवालेगुण राम के अपने अंदर ईक न पाले @गौरव बलोरिया 
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